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!! तिल तिल मरते लोग तड़पते लोग फिर भी नहीं डरते लोग !!
October 14, 2020 • Mr. Dinesh Sahu • मध्यप्रदेश

गरीब जनता को खूब गले लगा रहे हैंगरीबो के बच्चों को गोद में लेकर उनके गालों को चूम रहे हैं

यह है मध्य प्रदेश की जनता सब कुछ जानने लगी है साथ ही पहचानने लगी है आए देखें चुनावी दंगल देर से ही सही समझ में आ रहा है जन मानस के कोरोना ने छीनी हमारी खुशियां रोज़गार और तोड़े हमारे सपने।मौत के आंकड़े धीरे-धीरे बढ़ते जा रहेए सौ से पहुंचे हज़ार और हज़ार से लाख मेंए यह सिलसिला बदस्तूर अब भी जारी हैआश्चर्य इस बात का हैए जब लॉक डाउन की जरूरत नहीं थी तब सरकार ने लॉक डाउन लगाएं। 25 मार्च 2020 को भारत में केवल 571 कोरोना के मामले सामने आए थेए सरकार ने ताबड़तोड़ तरीके से पूरे भारत में एक साथ लॉकडाउन लगा दिया थाए आज की स्थिति यह हैए रोज़ तकरीबन 50 हज़ार से 60 हज़ार मामले दर्ज हो रहे हैंए कोरोना वायरस के कारण एक लाख नौ हज़ार लोगों ने अपनी जान गवाई। कोरोना वायरस संक्रमण ने पूरे भारत को अपनी चपेट में ले चुका हैहर रोज़ मौत के आंकड़े सैकड़ों की संख्या में बढ़ते जा रहे हैंए हज़ारों की संख्या में संक्रमितों के। इन सबके बीच उम्मीद की बात सिर्फ इतनी है कि बहुत से मामलों में लोग ठीक भी हुए हैं कोरोना वायरस से संक्रमित हर शख़्स का एक अलग अनुभव हैए कुछ में इसके बेहद सामान्य या फिर यूं कहें कि बेहद कम लक्षण नज़र आते हैए तो कुछ में यह काफी गंभीरए कुछ तो ऐसे मामले भी सामने आए हैं। जिनमें लक्षण वो थे ही नहीं जिनके बारे में स्वास्थ्य विभाग सचेत करता रहा  हैए लेकिन एक बार ये पता चल जाए कि आप संक्रमित हैंए तो अस्पताल जाने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं बचता है

पर चुनाव के समय हमारे नेताओं को इन सब बातों से कोई लेना-देना नहींए उनका लक्ष्य केवल चुनाव जीतना कोरोना से हमें कोई लेना देना नहीं। कोरोना वायरस के बीच देश में पहला चुनाव और उप चुनाव होने जा रहा हैए महामारी के बीच चुनाव आयोग की सबसे बड़ी चिंता यही थी कि चुनाव टाले जाएं या नहींए महामारी में बड़े उतारचढ़ाव दिख रहे हैए फिर भी चुनाव की तारीख घोषित कर दी गई। मध्य प्रदेश में उपचुनाव के दौरान सरकार ने नया फरमान जारी कर दिया पहले केवल 100 लोग चुनावी सभा में शामिल हो सकते थेए अब नए फरमान के अनुसार जितने लोग चाहें वह चुनावी रैलियों में जा सकते हैंए नेता जी के भाषण पर खूब तालियां बजा सकते हैं। बस सामाजिक दूरी का ध्यान रखना होगा। जब हमारे नेता सामाजिक दूरी का ध्यान नहीं रखतेए तो आम जनता से क्या उम्मीद लगा सकते हैं। इसके बावजूद मध्य प्रदेश के नेता उप चुनाव की तैयारियों में लग गए हैंए सामाजिक दूरी का मखौल उड़ाते नेताए फिर से नेताओं की नौटंकी शुरू हो गईए लोगों को रिझाने के लिए नोट बाटे जा रहे हैंए लोगों के पैर छू छू कर वोटों की भीख मांग रहे हैं नेता। ऐसा लगता हैइन नेताओं से कोरोना वायरस डरता हैए नेताओं के चेहरे से मास्क गायबए मास्क नहीं लगाने की मजबूरी नेताजी बड़े भोले अंदाज में बताते हैं। अगर जनता चेहरा नहीं देखेगी तो वोट कैसे देगी। नेताजी भूल गए कोरोना वायरस को। गरीब जनता को खूब गले लगा रहे हैंए गरीबो के बच्चों को गोद में लेकर उनके गालों को चूम रहे हैं बच्चे की बहती नाक अपने रुमाल से पोछ कर अपना प्यार जनता पर लुटा रहे हैं। चुनाव हारने का डर नेताजी से ज्यादा उनकी पत्नी यानि मेमसाब को हैए मेम साहब की रातों की नींद उड़ गई हैए रात में बुरे बुरे सपने आते हैंए कि नेताजी चुनाव हार गए हैंए मेम साहब के ऐशो आराम खत्म हो गए हैं ए मेम साहब की एक आवाज़ पर नौकर और नेताजी के चमचे दौड़कर मेमसाब की सेवा में लग जाते हैंए मेम साहब की एक आवाज़ पर चार चार गाड़ियां खड़ी हो जाती हैए मेम साहब को रात में नेताजी के साथ नोट गिनने की मशीन पर नोट गिनने में बहुत मजा आता हैए अगर नेताजी चुनाव हार जाएंगेए तो यह सब ऐशो आराम खत्मए इसलिए यह सब नौटंकी चुनाव के समय गरीब जनता के सामने की जाती है। यह प्यार केवल चुनाव जीतने तक सीमित रहता है। चुनाव जीतने के बाद नेताजी को गरीब जनता से एलर्जी हो जाती हैए जब जनता नेताजी के हैए तो नेता जी पहचान ने से इनकार कर देते हैं

प्रदेश में उप चुनाव को लेकर नेताजीए लोगों को जोड़ने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं कोई नोट बांट रहा हैंए कोई जनता के पैर पड़ कर माफी मांग रहा हैंए कोई मास्क और सैनिटाइजर बांट रहा हैंए इन हथकंडो के सहारे वोट जुटाने की जुगत में लग गए हैं। भागवत कथाए यज्ञ और भंडारे में लोगों को खास तवज्जो मिल रही है। कोई खिचड़ी बंटवा रहाए तो कोई दाल-बाफले की पार्टी दे रहा है। इतना ही नहीं साड़ी बंटवाने से लेकर धार्मिक यात्राएं के वादे भी किए जा रहे है। उपचुनाव में जबर्दस्त घमासान की उम्मीद है। एक नेता जी ने लोगों के लिए प्रसाद से लेकर साबूदाने की खिचड़ी तक की व्यवस्था की है। पर नेताजी कोरोना की बीमारी को भूल गए हैं सामाजिक दूरी की धज्जियां उड़ाई जा रही है नेताजी के साथ उनके चमचों का हुजूम चल रहा हैए जिनको रोज़ के 500 मिलते हैं ना नेताजी के चेहरे पर मास्क होता है और ना ही उनके चमचों के। वहीं आम जनता अगर गलती से बगैर मास्क के बाहर निकलती हैए तो उनके ऊपर चालानी कार्रवाई की जाती है रात 8:00 बजे पुलिस की गाड़ियों के सायरन बजना शुरू हो जाते हैं छोटी छोटी दुकानों से लेकर रोज़ कमाने खाने वाले ठेले वालों की जबरन दुकानें बंद करवाते हैं और ठेले हटवाते हैं कोरोना का डर दिखाते हैं। ऐसा लगता है रात 8:00 बजे के बाद ही कोरोना वायरस के कीटाणु सक्रिय हो जाते हैं। इसीलिए पुलिस प्रशासन 8:00 बजे से पहले दुकानें बंद करवाना शुरू कर देते है जितनी सख्ती आम लोगों के साथ और गरीब व्यापारियों के साथ होती हैए उतनी सख्ती उप चुनाव के समय नेताओं के साथ हो तो माने के इंसाफ सबके लिए बराबर है ।

उपचुनाव में हमने देखा एक नेता जैसा आदमी।एक गरीब के पैर पर पड़ था मुझे आश्चर्य हुआ पता चला वह चुनाव में खड़ा था।।

डॉ जाकिर शेख सब एडिटर मध्य प्रदेश