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70 साल का जवाब मांगने के पूर्व प्रधान सेवक जी,कृपाकर सिर्फ सिर्फ 4 माह को लेकर ही कुछ कहें....कुछ करें........* / के के मिश्रा
May 17, 2020 • Mr. Dinesh Sahu

*70 साल का जवाब मांगने के पूर्व प्रधान सेवक जी,कृपाकर सिर्फ सिर्फ 4 माह को लेकर ही कुछ कहें....कुछ करें........*
*माननीय प्रधानमंत्री जी, सादर अभिवादन,*                      
          *कोरोना संक्रमण के कहर के बीच 12 मई, 2020 को 'राष्ट्र के नाम प्रसारित अपने संदेश' की शुरुआत में ही आपने खुद यह स्वीकार करते हुए कहा कि समूचे विश्व के साथ भारत देश भी पिछले "4 माह" से कोरोना महामारी के संकट से जूझ रहा है,इस अवधि में भारत में जहां चीन के बराबर न केवल कोरोना संक्रमितों की संख्या हो चुकी है,बल्कि देश विश्व के 11 सबसे प्रभावित देशों में भी भारत शामिल हो चुका है!!,लिहाजा,देश आपसे विनम्रता पूर्वक कुछ यक्ष प्रश्नों के उत्तर चाहता है....*
      *(1)अब जब आपने ही स्वीकार कर लिया है कि कोरोना का प्रभाव 4 माह पहले से शुरू हो चुका था,10 फर. 2020 को WHO ने पूरे विश्व को इस बाबत आगाह कर दिया था, 30 जनवरी, 2020 को केरल में पहला पोजेटिव संक्रमित सामने आ चुका था,तब भी 13 मार्च तक भारत सरकार यह कहती रही कि देश में इसका खतरा नहीं है,ऐसा क्यों?, 24 मार्च की रात अचानक बिना किसी तैयारी के लॉक डाउन की घोषणा कैसे कर दी गई? इतने दिनों तक हम खामोश क्यों रहे?.....शायद अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की चाकरी मज़बूरी रही होगी?*
    *(2) क्या यह सच नहीं है कि 20 फरवरी को ट्रम्प के साथ 500 अन्य लोगों का काफ़िला भी भारत आया था, जिसने दिल्ली गुजरात,मुम्बई,आगरा का दौरा किया। ये चारों ही इलाके आज देश के "हॉटस्पॉट" बने हुए हैं,जिम्मेदार कौन?*
    *(3)आप 1 अरब 30 करोड़ की आबादी वाले मुल्क के प्रधान सेवक हैं, जिसमें लगभग 4 करोड़ 60 लाख प्रवासी मज़दूर हैं और करीब 12 हज़ार ट्रेने हैं,क्या कारण रहा कि आज  लॉक डाउन के 2 माह बाद भी देश का भूखा-प्यासा,भीषण धूप में नंगे पैर फटे हाल गरीब मज़दूर अपने मासूम बच्चों-परिवार के साथ अपने घर तक पैदल पहुंचने और विभिन्न दुर्घटनाओं काल कवलित होने को मजबूर है,जबकि दो माह से यह ट्रेने सिर्फ खड़ी हुई हैं,क्या इनका उपयोग प्रवासी मज़दूरों के लिए नही किया जा सकता था? जिम्मेदार कौन?इस विषयक सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में केंद्र का तर्क तो और भी अधिक निंदनीय व शर्मनाक है!*
     *प्रधान सेवक जी,आपका वह कौन उद्योगपति करीबी मित्र है जिसने WHO की इस बारे में इतला के बाद अंतरराष्ट्रीय विमान सेवाओं को तत्काल प्रभाव से बंद किये जाने के विचार को यह कह कर रुकवा दिया था कि इससे देश की अर्थ व्यवस्था लड़खड़ा जाएगी?क्या आज हमारी अर्थ व्यवस्था महाशक्ति राष्ट्रों के समकक्ष खड़ी है?*

      *(4)प्रधान सेवक जी,यह 2019 के मध्य तक के आंकड़े हैं कि आपने प्रधानमंत्री बनने के बाद विश्व के 84 देशों की सरकारी खजाने के खर्च से सम्पन्न यात्रा में 280 मिलियन डॉलर यानी 2000 हज़ार करोड़ रु.और विज्ञापनों में अपनी ब्रांडिंग पर 640 मिलियन डॉलर यानी 4,607 करोड़ रु. कुल 66 अरब के करीब खर्च कर दिए!! आप विमानों से विदेश घूमें और प्रवासी मज़दूर पैदल? वह उसके घर की चौखट भी न छू सके,इस क्रूरता का जवाबदार कौन?*
    *(5)कोरोना संक्रमण की असफलता से देश का ध्यान बांटने के लिए आपकी विचारधारा ने प्रायोजित ढंग से "नफ़रत के वायरस" को फैलाने में भी कोई कसर नहीं छोड़ी! "तब्लीकी जमात" के नाम का सहारा लेकर कोरोना को हिन्दू-मुसलमान में बांट दिया,खूब मशक्कत की!! यहां मैं एक बार फिर स्पष्ट कर दूं कि न मैं हिन्दू हूँ, न मुसलमान,मैं हूँ एक इंसान, "यदि यह जमात दोषी है तो एक भारतीय नागरिक के रूप में मैं देश,कानून व संविधान के साथ हूँ," किन्तु आपसे यह भी जानना चाहूंगा कि 20 फरवरी को मलेशिया में सम्पन्न मजलिस में इस जमात के जिन-जिन लोगों ने शिरकत की उन्हें "वीज़ा" किसने दिया, जिम्मेदार कौन?* 
*जैसी की आम चर्चा है कि जमात के मुखिया मौलाना मोहम्मद साद की इस दौरान देश के सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल से मुलाकात हुई है,क्या यह सही है! यदि गलत है तो इतने बड़े आरोप का केंद्र ने आज तक खंडन क्यों नहीं किया?*
      *आपने तो प्रधानमंत्री बनने के पहले दाऊद इब्राहिम को (चाहे वह कहीं भी छुपा हो) गिरफ्तार कर भारत लाने की घोषणा की थी,अब तक मौलाना साद को को ही नहीं पकड़ पाए हैं?*
       *प्रधानसेवक जी, चार माह पूर्व WHO की इस संदर्भित चेतावनी को आपने अपने निजी हितों की पूर्ति करने हेतु नज़रंदाज़ किया,अपनी विफलता के स्मारक की साख बचाते हुए देश के विपक्षी राजनैतिक दलों से परहेज़ कर उन्हें व देश को बिना विश्वास में लिए बगैर,बिना किसी पूर्व तय्यारी के यकायक लॉक डाउन की घोषणा कर दी, लॉक डाउन चलते हुए करीब दो माह होने वाले हैं,संक्रमण का कहर निरन्तर बढ़ रहा है,पूरे देश में अपने घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों की विभिन्न दुर्घटनाओं से अंतहीन मौतों का तांडव जारी है,आपकी दहाड़ कहाँ खामोश है?इसे थामने के असफल प्रयास नाकाफ़ी क्यों दिखाई दे रहे हैं,यही कारण है कि हम संक्रमितों की संख्या में चीन के बराबर होकर 11 सबसे प्रभावित देशों में शामिल हो चुके हैं,जिम्मेदार कौन?*
      *आश्चर्य है कि लोक डाउन-4.0 की प्रस्तावना के लिए अब विपक्ष के सुझावों की बात सामने आ रही है,पहले विपक्ष को विश्वास में न लिए जाने का कारण क्या था,अब यह दुलार क्यों?*