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बीजेपी सरकार को उपदेश देने के बजाय छात्रों के मन की बात सुननी चाहिए।
August 31, 2020 • Mr. Dinesh Sahu • राजधानी - भोपाल

कुणाल चौधरी ने कहा कि सरकार भूल रही है कि देश में 0 से बढ़कर आज 34 लाख कोरोना मरीज हो गए हैं।

भोपाल,

केंद्र की मोदी सरकार इस कोरोना महामारी के दौरान WHO द्वारा जारी गाइडलाइन की न सिर्फ अवहेलना कर रही है बल्कि देश के भविष्य के जीवन को भी खतरे में डाल रही हैबीजेपी सरकार को उपदेश देने के बजाय छात्रों के मन की बात सुननी चाहिए। ऐसा माना जा रहा है कि सितंबर में कोरोना वायरस के मामले और बढ़ सकते हैं, ऐसी स्थिति में परीक्षाएं कैसे कराई जा सकती हैं? केंद सरकार द्वारा मेडिकल और इंजीनियरिंग यूजी प्रवेश परीक्षाएं नीट और जेईई मेन के एंट्रेंस एग्जाम करने को लेकर मध्य प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और कालापीपल विधानसभा से विधायक कुणाल चौधरी ने विरोध जताते हुए यह बात कही है। उन्होंने कहा कि जब पूरे देश में कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में परीक्षाओं का आयोजन केंद्र सरकार की हठधर्मिता है। लाखों विद्यार्थियों को देश भर के सेंटरों पर जाना पड़े और इस दौरान उनके साथ उनके माता-पिता या कोई परिजन भी होगा। ऐसे में उन सभी परीक्षार्थियों और उनके परिजनों को संक्रमण का खतरा है और बच्चों के जीवन से खिलवाड़ कांग्रेस पार्टी बिकुल भी बर्दाश्त नहीं करेगी

कुणाल चौधरी ने चार बड़े मुद्दे गिनाए उन्होंने कहा कि एक तो सुरक्षा और स्वास्थ्य है दूसरा - इस पूरे मामले की सुरक्षित परिवहन व्यवस्था कैसे होगी? तीसरा - वो संतुलित तौर-तरीके जिससे कि आप दोनों उद्देश्य उपलब्ध कर सकें, स्वास्थ्य का भी और शिक्षा का भी और चौथा, कि वो कौन से अनिवार्य नीति, नियम होंगे, जिनके आधार पर आप ये सब कर पाएंगे

कुणाल चौधरी ने कहा कि सरकार भूल रही है कि देश में 0 से बढ़कर आज 34 लाख कोरोना मरीज हो गए हैं। देश में, हर रोज 60 - 70 हजार नए कोरोना मरीज सामने आ रहे हैइस दौरान नीट के लिए साढ़े 16 लाख और जेईई के लिए साढ़े 9 लाख परीक्षार्थी जो लगभग 27 लाख परीक्षार्थियों हैं। इन परीक्षार्थियों और उनके परिवार जनों के जीवन के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। देश मे जहाँ 34 लाख कोरोना संक्रमित है और 60 हजार की मृत्यु हो चुकी है। उन्होंने कहा की जेईई के लिए मात्र 660 सेंटर हैं, लगभग साढ़े 9 लाख लोगों के लिए 1400 या 1500 लोग प्रति सेंटर का बंटवारा किया गया है। जबकि नीट के लिए 450 लोग लगभग प्रति सेंटर हैं। अब एक तरफ आप बात करते हैं सामाजिक दूरी की और दूसरी तरफ इस प्रकार की डेंसिटी की, 1500 और 450। परीक्षा अप्रैल से स्थगित हुई जून में, जून से अब सितंबर और इस वक्त सिर्फ जल्दबाजी में तारीखें दी गई हैं। अचानक एक फरमान आ गया कि अगस्त में 1 सितंबर से एक परीक्षा शुरु होगी और 13 सितंबर से दूसरी आखिर इतने कम समय में 27 लाख के करीब बच्चे कैसे अपना सामंजस्य बना पाएंगे। उन्होंने ने आगे कहा कि भारत में लगभग 1 हजार यूनिवर्सिटीज़ हैं, जिनमे कम से कम 3 लाख प्रोफेशर्स होंगे, और सरकार कह रही है - 150 प्रोफेशर्स कि बात मान लो। बाकी जो 2 लाख 98 हजार से ज्यादा प्रोफेशर्स हैं, उनकी क्यों नही सुन रही सरकार? 150 की संख्या ज्यादा बड़ी है या 2 लाख 98 हजार??

कुणाल चौधरी ने कहा कि जेईई और नीट परीक्षार्थियों के भविष्य के लिए सबसे कठिन और महत्वपूर्ण परीक्षा है, जिससे उनका भविष्य तय होगा और ऐसी परिस्तिथियों में बिना पूरी तैयारी से परीक्षा देना बच्चों के लिए और भी कठिन होगा। कुणाल चौधरी ने कहा कि कोई भी नहीं चाहता कि बच्चों का साल बर्बाद हो जाये, लेकिन सरकार को कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष जो परीक्षार्थी है उनके लिए विशेष शिड्यूल बनाना चाहिए। जिसे जो साल बर्बाद हुआ है वह पूर्ण हो जाये। कुणाल चौधरी ने कहा कि अदालत का मकसद भविष्य सवारना है और सरकार को इसकी ज़िम्मेदारी लेना चाहिए। सरकार को रास्ता निकलना चाहिए साल भी बर्बाद ना हो और परीक्षार्थियों को सुरक्षित परीक्षा देने का मौका भी मिले। कुणाल चौधरी ने कहा कि परीक्षार्थियों से कोविड का अंडरटेकिंग भरवाया जा रहा है, जिसमें उन्हें अलग-अलग निर्देश दिए जा रहे हैं। कोरोना के लिए क्या-क्या करना इस बारे में भी बार-बार वेबसाइट पर निर्देश मिल रहे हैं। कुणाल चौधरी ने कहा कि बच्चे पढ़ाई पर ध्यान दें या दिनभर वेबसाइट देखें? उन्होंने कहा कि सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि वैश्विक महामारी में जो परीक्षार्थी कोरोना से ग्रस्त होंगे या क्वारंटाइन होंगे तो वह परीक्षा से वंचित रहेंगे? इस महामारी से बीमार होने में उन बच्चों का कोई दोष नहीं है? आखिर इन बच्चों के भविष्य का फिर क्या होगा? जो बच्चे मंहगा परिवहन का खर्च नहीं उठा पायेंगे,वे क्या करेंगे।या तो शासन हर जिले में परीक्षा केन्द्र खोले या उड़ीसा सरकार जैसे मुफ्त परिवहन की व्यवस्था करे।

कोरोना का दंश झेल चुके प्रदेश युवा कांग्रेस अध्यक्ष व विधयक कुणाल चौधरी ने चिंता जताते हुए कहा सभी सेंटर पर थर्मल स्कैनिंग की जाएगी, लेकिन टेंपरेचर गन से कोई फायदा नहीं है। क्योंकि कोविड़ एक ऐसी बीमारी है जो सिर्फ टेंपरेचर के आधार पर नहीं चलती है, इसकी शुरुआत होने तक से कम से कम 48 घंटे तक तो मालूम भी नहीं पड़ता है कहीं पर और टेंपरेचर के अलावा कई ऐसे सिम्टमस होते हैं, खुद कोविड़ नोन सिम्टोमेटिक होती है। तो टेंपरेचर गन से कहते हैं आप कि हमने सुरक्षा चक्र बना दिया है और आज बहुत सारे लोग सिर्फ ग्रामीण ही नहीं, अधिकतर गांवों से हैं, लेकिन ना शहर, ना ग्रामीण, अर्बन भी हैं, सेमी अर्बन भी हैं, टायर टू टायर थ्री शहरों के भी हैं। उन्होंने ने कहा कि हमारे रेलवे बाकि वाहन 33 से 50 प्रतिशत की कपैसिटी से चल रहे हैं और उसमें सरकार आवागमन के लिए बच्चों को बाध्य कर रही है कुणाल चौधरी ने कहा कि देश में लोग बेमौत मर रहे हैं और सरकार एक एग्जाम बचाने के लिए पूरी ताकत क्यों लगा रही है ? लोग जिंदा रहेंगे तो अगले साल फिर एग्जाम दे देंगे। मोदी जी एग्जाम के पीछे इसलिए पड़े हैं ताकि आर्थिक बर्बादी और बेरोजगारी से जनता का ध्यान भटकाया जाए और सरकारी मीडिया - "रिया और .... ये एग्जाम क्यों नही हो रिया दिखाती रहे."

कुणाल चौधरी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट जीवन भर से वकालत कर रहे प्रशांत भूषण जी को भी सजा देने पर आमादा है, जबकि सुप्रीम कोर्ट में वकालत करने वाले कई वरिष्ठ वकीलों सहित एडवोकेट जनरल भी सजा न देने की मांग कर चुके हैं। फिर, इसके पहले, PM CARE FUND की ऑडिट की याचिका, SC/ST एक्ट की याचिका, CAA और NRC पर भी जनता की आवाज नही सुनी सुप्रीम कोर्ट ने, तो क्या इससे विरोध करने का जनअधिकार खत्म हो जाता है? नहीं, उन्होंने कहा कि जनता को अपने हित के लिए सड़कों पर उतरने का अधिकार हमेशा होता है। 90% NEET और JEE स्टूडेंट्स पसन्द का सेंटर दिया जाने की बात कर रहे हैं. कुणाल चौधरी ने कहा कि लगभग 27 लाख स्टूडेंट्स एग्जाम में बैठेंगे, इनमें से 90% को सरकार ने पूरा हिसाब लगा लिया कि पसन्द का सेंटर देने के लिए कितना पैसा खर्च होगा, कितना स्टाफ लगेगा, कितनी मशीनरी लगेगी, ये हिसाब तो जल्दी लगा लिया. लेकिन ये बताओ कि बाकी बचे 10% मतलब 2 लाख 80 हजार स्टूडेंट्स को तो सफर करना पड़ेगा, घर से बाहर निकलना पड़ेगा, उनकी पसंद का सेंटर नही मिलेगा वो कैसे जाएंगे एग्जाम देने? और क्या सरकार गेरंटी लेगी कि उनमें से किसी को कोरोना नही होगा?