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भारत कोविड-19 की महामारी से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले देशों की सूची में 10वें नंबर पर आ गया है.
May 25, 2020 • Mr. Dinesh Sahu • देश / विदेश

भारत कोविड-19 की महामारी से सबसे ज़्यादा प्रभावित होने वाले देशों की सूची में 10वें नंबर पर आ गया है. भारत में कोविड 19 पर काम करने वाले शोधर्काताओं का कहना है कि जुलाई तक भारत में कुछ लाख मामले बढ़ सकते हैं. जॉन्स हॉपकिंस यूनिवर्सिटी के आँकड़ों के अनुसार भारत में कोरोना वायरस से संक्रमण के 138,536 मामले अब तक दर्ज किए जा चुके हैं.क्या कहते हैं मॉडलिंग डेटा समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने इस बारे में यूनिवर्सिटी ऑफ़ मिशिगन में बॉयोस्टैटिस्टिक्स और महामारी रोग विशेषज्ञ प्रोफ़ेसर भ्रमर मुखर्जी से बात की. प्रोफ़ेसर भमर मुखर्जी का कहना है कि भारत में संक्रमण के मामलों का बढ़ना अभी कम नहीं हुआ है.

कोरोना मरीज़ों की संख्या में महाराष्ट्र टॉप पर महाराष्ट्र में मरीजों की संख्या 50 हज़ार पार है. यानी देश के कुल आँकड़ों का एक तिहाई हिस्सा अकेले महाराष्ट्र में ही है. बड़ी बात ये है कि यहां के अस्पतालों में कोविड19 के मरीजों के लिए बेड की कमी है और इलाज के लिए डॉक्टर भी काफ़ी नहीं पड़ रहे हैं. ये बात अब महाराष्ट्र सरकार भी खुल कर स्वीकार कर रही है. महाराष्ट्र सरकार ने केरल सरकार से डॉक्टरों की एक टीम भेजने की की गुज़ारिश भी की है. हालांकि ये बात सही है कि महाराष्ट्र सरकार अस्थायी तौर पर मरीजों के लिए अस्पताल बनाने और प्राइवेट अस्पतालों में मरीजों के के लिए और आईसीयू केयर जुटाने में लगी है, लेकिन बढ़ते मामलों की रफ्तार और सरकार की रफ्तार में अब भी तालमेल नहीं हैं. घरेलू उड़ाने और ट्रेन के चलने से महाराष्ट्र में मरीजों की संख्या आने वाले दिनों और ज़्यादा बढ़ सकती है.

दिल्ली का हाल कुछ इसी तरह का हाल राजधानी दिल्ली का भी है. हालांकि दिल्ली में कोविड19 के मरीजों की संख्या तकरीबन 13 हज़ार है. पूरे देश में कोरोना मरीजों की संख्या के मामले में दिल्ली चौथे स्थान पर है. लेकिन पिछले एक हफ्ते में मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ी है. रविवार शाम को दिल्ली सरकार ने 50 और उससे ज़्यादा बेड की क्षमता वाले निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स को 20 प्रतिशत बेड कोविड-19 के मरीजों के लिए आरक्षित रखने का निर्देश दिया है. दिल्ली में ऐसे निजी अस्पतालों और नर्सिंग होम्स की संख्या 117 है. दिल्ली में रविवार को कोरोना के 508 मामले सामने आए हैं और अब यहाँ मरीजों की संख्या 13,418 हो गई है. प्रेस ब्रीफिंग में सरकार ने कहा है कि सभी मरीजों को अस्पताल में भर्ती कराए जाने की ज़रूरत नहीं है और यो अस्पतालों में बिस्तरों की संख्या बढ़ाने के लिए तेज़ी से क़दम उठा रही है. सरकार ने होम आइसोलेशन को लेकर नियम भी बनाए हैं. चार लॉकडाउन का असर देश में पहले लॉकडाउन की घोषणा का सबने स्वागत किया था. उस समय जानकारों की राय थी कि लॉकडाउन में जो समय हमें मिलेगा वो काफ़ी होगा, मेडिकल लेवल पर इस महामारी से निपटने के लिए भारत को तैयार करने में. लेकिन जिस तेज़ रफ्तार से आँकड़े बढ़ते जा रहे हैं, उसको देख कर लग रहा है कि तैयारी में अब भी कमी है. प्रोफ़ेसर भमर मुखर्जी ने भारत में कोविड19 के मरीज़ों के अनुमान, सरकार द्वारा उठाए गए कदमों और लॉकडाउन के असर पर एक रिसर्च पेपर भी लिखा है. ये पेपर ससेप्टबल इन्फेक्टड रिकवर्ड मॉडल (SIR) डेटा पर आधारित है, जो 14 अप्रैल तक के लॉकडाउन अवधि के दौरान लिया गया था. दिक्कत भी नहीं हो रही है." भारत में अगर पॉज़िटिव केस सामने आता है तो 21 दिन क्वारंटीन में रहने पर गरीब लोगों के पास भूखों मरने की नौबत आ सकती है. इसलिए लोग टेस्ट से बच भी रहे हैं. अगर भारत सरकार भी ऐसी की व्यवस्था करती है तो लोग टेस्ट कराने से बचेंगे नहीं. ऐसा करने से लॉकडाउन जैसी सख़्त व्यवस्था की ज़रूरत नहीं पड़ेगी.