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छत्तीसगढ़ राज्य के पहले मुख्यमंत्री अजित जोगी का आज रायपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया - दैनिक रोजगार के पल परिवार श्री जोगी को विनम्र श्रद्धांजली अर्पित करता है
May 29, 2020 • Mr. Dinesh Sahu • सम्पादकीय

अजित जोगी: अध्यापक, आईपीएस, आईएएस और सीएम से लेकर बागी तक

छत्तीसगढ़ राज्य के पहले मुख्यमंत्री अजित जोगी का आज रायपुर के एक निजी अस्पताल में निधन हो गया. इसी महीने की नौ तारीख़ को गंगा इमली नामक एक फल का बीज उनकी श्वांस नली में अटक गया था. इसके बाद कॉर्डियक अरेस्ट के कारण उन्हें रायपुर के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था. प्राध्यापक, आईपीएस, आईएएस, सांसद और फिर मुख्यमंत्री तक का सफ़र तय करने वाले अजीत जोगी पिछले 16 सालों से व्हीलचेयर पर थे. एक सड़क दुर्घटना के बाद उनके कमर के नीचे के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया था. लेकिन अजित जोगी अपने जीवन के अंतिम दिनों तक अपनी इच्छाशक्ति और जिजीविषा के बल पर राज्य के सर्वाधिक चर्चित नेता बने रहे. उनके विरोधी भी कहते थे कि जोगी व्हीलचेयर के सहारे नहीं, विलपावर' यानी इच्छाशक्ति के सहारे हैं. 21 अप्रैल 1946 को छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में जन्मे अजित जोगी ने भोपाल से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और बाद में उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की डिग्री ली. जोगी ने कुछ समय तक रायपुर के इंजीनियरिंग कॉलेज में अध्यापन भी किया. यहीं रहते हुये उन्होंने सिविल सर्विसेस की परीक्षा दी और भारतीय पुलिस सेवा के लिये चुने गये. डेढ़ साल तक पुलिस सेवा में रहने के बाद जोगी ने फिर से परीक्षा दी और वो भारतीय प्रशासनिक सेवा के लिये चुन लिये गये. इन परीक्षाओं में कभी आरक्षण का लाभ नहीं लेने वाले अजित जोगी खुद को आदिवासी मानते थे लेकिन पिछले कई सालों से उनकी जाति पर विवाद बना रहा. अभी भी उनकी जाति का मामला न्यायालय में लंबित जोगी अविभाजित मध्य प्रदेश में 14 सालों तक कई महत्वपूर्ण ज़िलों के कलेक्टर रहे. अपनी दबंग छवि के कारण वो मध्य प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अर्जुन सिंह के काफ़ी नज़दीकी लोगों में शुमार थे.लोकसभा चुनाव में हार के बाद बने मुख्यमंत्री 1998 में उन्होंने रायगढ़ लोकसभा से पहली बार चुनाव लड़ा और वो संसद पहुंचे. हालांकि एक साल बाद 1999 में उन्हें हार का सामना करना पड़ा. तब मान लिया गया था कि पार्टी में अब जोगी को हाशिये पर ही रहना होगा. लेकिन वर्ष 2000 में मध्य प्रदेश से अलग जब छत्तीसगढ़ राज्य बनाया गया तो मुख्यमंत्री के तमाम नामों की अटकलों के बीच अप्रत्याशित रूप से अजित जोगी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बनाये गये. लेकिन कहा जाता है कि अफ़सर से नेता बने जोगी ने अपने अफ़सरों पर कहीं अधिक भरोसा किया और राज्य में अफ़सरशाही ने पार्टी के नेताओं को ही हाशिये पर खड़ा कर दिया. सरकार एक के बाद एक गंभीर आरोपों में उलझती गई.

दुर्घटना चुनाव के दौरान ही 20 अप्रैल 2004 में जोगी एक सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो गये और उनके कमर से नीचे के हिस्से ने काम करना बंद कर दिया. तब से वो अब तक व्हीलचेयर पर ही थे. लेकिन अजित जोगी की राजनीति पहले की तरह जारी थी. 2008 के विधानसभा चुनाव में राज्य में शीर्ष नेताओं ने कुल मिलाकर जितने दौरे किये थे, उससे अधिक दौरे और भाषण, अकेले व्हीलचेयर पर बैठे अजीत जोगी के हिस्से में थे.

छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस इसके बाद अजित जोगी ने खुद ही कांग्रेस पार्टी से इस्तीफ़ा दे दिया. अजित जोगी को लेकर तरह-तरह के कयास लगते रहे लेकिन जोगी ने 23 जून 2016 को छत्तीसगढ़ जनता कांग्रेस नाम से खुद की पार्टी बनाने की घोषणा की. अजित जोगी की लोकप्रियता के कारण माना जा रहा था कि उनकी पार्टी राज्य में सरकार बना पाये या न बना पाये, राज्य में सरकार बनाने में सबसे निर्णायक भूमिका ज़रूर निभायेगी. यह भी दिलचस्प है कि छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी की सरकार और नेताओं को लगातार घेरने वाले अजीत जोगी ने यथासंभव सोनिया गांधी को लेकर कभी कोई प्रतिकूल टिप्पणी नहीं की. यही कारण है कि राजनीतिक गलियारे में अफ़वाहें फैलती रहती थीं कि अजित जोगी किसी भी दिन कांग्रेस पार्टी में शामिल हो सकते हैं. अब इन अफ़वाहों पर हमेशा-हमेशा के लिये विराम लग गया है.