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देश मे बलात यौनाचार पर जितनी चर्चा, परिचर्चा, बहस, कैंडल मार्च व प्रदर्शन हुए है, हो रहे है, शायद विश्व के किसी देश मे किसी विषय मे हुए हो
October 11, 2020 • Mr. Dinesh Sahu • सम्पादकीय

_बलात्कार का प्रचलित टू फिंगर और माइक्रोस्कोपिक स्लाइड परीक्षण के सापेक्ष अति आधुनिक समय सीमा में पशुओं पर सघन सर्वेक्षण करके वैज्ञानिक परीक्षा एवम मीडिया में सीमित चर्चा का अध्यादेश प्रख्यापित कर आई पी सी में योजन करने की आवयश्कता हैं_*

आलेख - *डॉ लोकेश शुक्ल* @7505330999

कानपुर ।देश मे बलात यौनाचार पर जितनी चर्चा, परिचर्चा, बहस, कैंडल मार्च व प्रदर्शन हुए है, हो रहे है, शायद विश्व के किसी देश मे किसी विषय मे हुए हो। निर्भया कांड हो या मनीषा ! प्रिंट, सोशल व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में शिक्षक से समाज सेवक तक भाग ले रहे हैं । सरकारी तंत्र रोकने का प्रयास कर रहा है, था राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड बयूरो द्वारा प्राप्त आकड़ो से आधी आबादी दहशत में है वही उसके संरक्षक भी अपनी पाल्या के पालन में ही परेशान है । महाभारत काल मे द्रोपदी के चीर हरण से मनीषा के मट्टी का तेल डाल कर आग लगाने के आरोप व घटना की निंदा की जाती रही है और कि जा रही है । *आरम्भ में फिल्मों में बलात्कार के दृश्यों* के द्वारा फिल्मो को और अधिक लोकप्रिय बनाने का प्रयास किया जाता था। नीली फिल्मो का व्यापार आज हॉलीवुड और बॉलीवुड के सापेक्ष सरल व 10 गुना ज्यादा है । आज देश मे चरित्र हत्या करके लूट के सापेक्ष सामान्य लूट का कारोबार भी 10 गुना ही होगा। महाभारत में भी चरित्र हत्या को सबसे बड़ी हत्या बताया गया है। मोनिका लेवन्सकी, पामेला बोर्ड्स, भारत देश के चीफ जस्टिस, भारत सरकार के मंत्री, सांसद, विधायक जन, संत महात्मा आदि के अनेक सकेन्डेल, शूर्पनखा का राम और लक्ष्मण संवाद भी सबकी जानकारी में है। विश्व मे प्रचार और प्रसारण से ही भाषा- भाषण का भावार्थ प्रख्यापित होता हैं , न्याय व प्रशासन व्यवस्था मौन है । मनुष्य की सबसे बड़ी हत्या के आरोप प्रत्यारोप के संदर्भ में और अधिक वैज्ञानिक विवेचना, सघन सतत शोध और समीक्षा होनी चाहिए । *बलात्कार क्या वास्तव में संभव है*, यदि हाँ तो कब, कैसे, कयो, किसकी सहमति से ? जीवधारी की प्रथम भूख रोटी द्वितीय भूख यौनाचार ही है। कही द्वितीय भूख को आधार बना करके बलात्कार-बलात्कार की भौ-भौ से अपराध जगत स्थापित करने का प्रयास तो नही हो रहा हैं। आज मंगल ग्रह पर जीवन की संभावना तलाश की जा चुकी है उस परिदृश्य के बाद बलात्कार का प्रचलित टू फिंगर और माइक्रोस्कोपिक स्लाइड परीक्षण के सापेक्ष अति आधुनिक समय सीमा में *पशुओं पर सघन सर्वेक्षण* करके, वैज्ञानिक परीक्षा एवम मीडिया में सीमित चर्चा का अध्यादेश प्रख्यापित कर आई पी सी में योजन करने की आवयश्कता हैं ।