ALL देश / विदेश सम्पादकीय लेख /आलेख अध्यात्म मध्यप्रदेश राजधानी - भोपाल खेल / विज्ञानं एवं टेक्नोलॉजी मनोरंजन / व्यापार रोजगार के पल शाषकीया विज्ञापन रोजगार के पल क्लासिफाइड विज्ञापन
एकादशी निर्जला उपवास प्रारम्भ करें एकादशी निर्जला उपवास प्रारम्भ करें - राकेश शौण्डिक (रांची - झारखण्ड ) 2 जून 2020 मंगल) 06:31 अंतराल - 3 जून 2020 ;बुध) 06:31 - 10:53 युधिष्ठिर ने कहा: जनार्दन ! ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष में जो एकादशी पड़ती हो कृपया उसका वर्णन कीजिये । भगवान श्रीकृष्ण बोले: राजन् ! इसका वर्णन परम धर्मात्मा सत्यवतीनन्दन व्यासजी करेंगेए क्योंकि ये सम्पूर्ण शास्त्रों के तत्त्वज्ञ और वेद वेदांगों के
May 21, 2020 • Mr. Dinesh Sahu • अध्यात्म

राकेश शौण्डिक (रांची - झारखण्ड )

2 जून 2020 मंगल) 06:31 अंतराल - 3 जून 2020 ;बुध) 06:31 - 10:53 युधिष्ठिर ने कहा: जनार्दन ! ज्येष्ठ मास के शुक्लपक्ष में जो एकादशी पड़ती हो कृपया उसका वर्णन कीजिये । भगवान श्रीकृष्ण बोले: राजन् ! इसका वर्णन परम धर्मात्मा सत्यवतीनन्दन व्यासजी करेंगेए क्योंकि ये सम्पूर्ण शास्त्रों के तत्त्वज्ञ और वेद वेदांगों के पारंगत विद्वान हैं तब वेदव्यासजी कहने लगे: दोनों ही पक्षों की एकादशियों के दिन भोजन न करे । द्वादशी के दिन स्नान आदि से पवित्र हो फूलों से भगवान केशव की पूजा करे । फिर नित्य कर्म समाप्त होने के पश्चात् पहलेब्राहमणों को भोजन देकर अन्त में स्वयं भोजन करे राजन् ! जननाशौच औरमरणाशौच में भी एकादशी को भोजन नहीं करना चाहिए । . यह सुनकर भीमसेन बोले: परम बुद्धिमान पितामह ! मेरी उत्तम बात सुनिये राजा युधिष्ठिरए माता कुन्तीए द्रौपदीए अर्जुनए नकुल और सहदेव ये एकादशी को कभी भोजन नहीं करते तथा मुझसे भी हमेशा यहीकहते हैं कि : भीमसेन !

तुम भी एकादशी को न खाया करो३१ किन्तु मैं उन लोगों से यही कहता हूँ कि मुझसे भूख नहीं सही जायेगी भीमसेन की बात सुनकर व्यासजी ने कहा : यदि तुम्हें स्वर्गलोक की प्राप्ति अभीष्ट है और नरक को दूषित समझते हो तो दोनों पक्षों की एकादशीयों के दिन भोजन न करना भीमसेन बोले : महाबुद्धिमान पितामह ! मैं आपके सामने सच्ची बात कहता हूँ एक बार भोजन करके भी मुझसे व्रत नहीं किया जा सकताए फिरउपवास करके तो मैं रह ही कैसे सकता हूँ, मेरे उदर में वृकनामक अग्नि सदा प्रज्वलित रहती हैए अत: जब मैं बहुत अधिक खाता हूँए तभी यह शांत होती है । इसलिए महामुने ! मैं वर्षभर में केवल एक ही उपवास कर सकता हूँ जिससे स्वर्ग की प्राप्ति सुलभ हो तथाजिसके करने से मैं कल्याण का भागी हो सकूँए ऐसा कोई एक व्रत निश्चय करके बताइये मैं उसका यथोचित रु.