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हालांकि कथित तौर पर अनुशासित कही जाने वाली भाजपा के आंतरिक संघर्ष से मेरा कोई व्यक्तिगत लेना-देना नहीं है,पर जब सार्वजनिक रूप से जूतम-पैजार के साथ उनके ही प्रदेश संगठन महामंत्री ,जो आरएसएस से  निर्यात किये जाते हैं,के ख़िलाफ़ टिकट वितरण में लेनदेन के संगीन आरोपों के प्रामाणिक पत्राचार के रूप में हो रहे हों, तो उसे सार्वजनिक करना भी मेरा राजनैतिक धर्म है।* - के के मिश्रा
May 15, 2020 • Mr. Dinesh Sahu • मध्यप्रदेश

*हालांकि कथित तौर पर अनुशासित कही जाने वाली भाजपा के आंतरिक संघर्ष से मेरा कोई व्यक्तिगत लेना-देना नहीं है,पर जब सार्वजनिक रूप से जूतम-पैजार के साथ उनके ही प्रदेश संगठन महामंत्री ,जो आरएसएस से  निर्यात किये जाते हैं,के ख़िलाफ़ टिकट वितरण में लेनदेन के संगीन आरोपों के प्रामाणिक पत्राचार के रूप में हो रहे हों, तो उसे सार्वजनिक करना भी मेरा राजनैतिक धर्म है।*
      *हाल ही में भाजपा के जिलाध्यक्षों की नियुक्तियों ने संघ कबीले के रिमोट से संचालित होने वाली पार्टी के कथित अनुशासन,पार्टी विद-ए-डिफरेंस और  वास्तविक चाल,चरित्र व चेहरे को बेनक़ाब कर दिया है।*
      *एक ओर दो दिन पहले ही सरकार के मुखिया श्री शिवराजसिंह चौहान ने पूर्ववर्ती कमलनाथ जी के नेतृत्व वाली सरकार के ख़िलाफ़ जांच के लिए अलग-अलग मंत्रिमंडलीय समूह गठित किया है,यहां यह बात मज़ेदार है कि इस समूह में जिन मंत्रियों का समावेश किया गया है,उन पर कांग्रेस में रहते हुए और गद्दारी करने के पूर्व उनके ही आका के चमचों ने भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए थे, क्या उन आरोपों को भी मंत्री समूह में शामिल कर जांच रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?*
     *दूसरी ओर,अब भाजपा के आतंरिक संघर्ष में नया मोड़ आ गया है। ग्वालियर महानगर के लिए नियुक्त अध्यक्ष श्री कमल माखीजानी के ख़िलाफ़ उठे स्वरों की आग ने भाजपा के प्रदेश संगठन महामंत्री श्री सुहास भगत को झुलसा दिया है,(उल्लेखनीय है, आगामी समय में राज्य में कुल 24 निर्वाचन क्षेत्रों में उप चुनाव हैं,उसमें 16 सिर्फ सीटें ग्वालियर-चम्बल संभाग की ही हैं) श्री "भगत" पर उनके "भक्तों" ने ही  सम्पन्न विधानसभा चुनाव में टिकट बेचने के न केवल आरोप लगाए हैं,बल्कि इस आरोपों का लिखित,हस्ताक्षरित दस्तावेज भी अपने राष्ट्रीय मुखिया श्री जे.पी.नड्डा को भेजा है। (संलग्न)*
       *इन आरोपों से खिन्न पार्टी नेतृत्व ने कुछ नेताओं पर दबाव बनाकर माफीनामा लिखवाया,खेद भी व्यक्त करवाया है,मीडिया प्रभारी जी को इस विषयक प्रेस विज्ञप्ति भी जारी करनी पड़ी!!किन्तु जिस तरह सिर फुटव्वल व टिकट बेचे जाने के संगीन आरोप वरिष्ठ पद पर काबिज़ व्यक्ति पर लगे हैं,उससे यह कहना प्रासंगिक होगा..."जिसके खुद के घर शीशे के बने हों,उसे दूसरे के घर पत्थर नहीं फेंकना चाहिए।"*
        *एक बार पुनः स्पष्ट कर दूं कि मेरा भाजपा के आंतरिक मसलों से कोई सरोकार नहीं है,परन्तु कथित कुलीनों की सच्चाई से अवाम को रूबरू करना भी मेरा धर्म है,क्षमा प्रार्थना के साथ......साा