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हवाई जहाज़ से आए झारखंड के प्रवासी मज़दूर लॉकडाउन में मजदूरों की रोती-बिलखती तस्वीरों के बीच झारखंड से एक अच्छी खबर है.
May 28, 2020 • Mr. Dinesh Sahu • देश / विदेश

लॉकडाउन में मजदूरों की रोती-बिलखती तस्वीरों के बीच झारखंड से एक अच्छी खबर है. रांची के बिरसा मुंडा एयरपोर्ट पर गुरुवार को मुंबई से वापस लौटने वाले कुछ मुस्कुराते चेहरे लोगों ने देखे. ये तस्वीरें उन श्रमिकों की हैं, जो विशेष विमान से राँची पहुंचे हैं. इस विशेष विमान का ख़र्च बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल के पूर्ववर्ती छात्रों ने उठाया है. वे लोग कुछ और विमानों का इंतज़ाम करा रहे हैं ताकि मजदूरों की सुखद वापसी हो सके. नेशनल लॉ स्कूल, बंगलोर के पूर्ववर्ती छात्रों के सहयोग एवं झारखण्ड एवं महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों समेत इस पुनीत कार्य में सम्मिलित सभी कोऑर्डिनेटरों के अथक परिश्रम से आज 174 मज़दूर सकुशल झारखण्ड, अपने घर लौटें। इस नेक एवं अद्वितीय कार्य के लिए मैं एलुमनाई नेटवर्क ऑफ नेशनल

घर वापस लौटने की खुशी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उन्हें शुभकामनाएँ दी हैं. मुख्यमंत्री ने कहा, "नेशनल लॉ स्कूल के पूर्ववर्ती छात्रों के सहयोग एवं झारखंड एवं महाराष्ट्र सरकार के अधिकारियों समेत इस पुनीत कार्य में सम्मिलित सभी कोऑर्डिनेटरों के अथक परिश्रम से 174 मज़दूर सकुशल घर लौटे. इस नेक एवं अद्वितीय कार्य के लिए मैं एलुमनाई नेटवर्क ऑफ नेशनल लॉ स्कूल का आभार प्रकट करता हूं. आपसे प्रेरित होकर अन्य संस्थाएँ भी भविष्य में मदद को सामने आएँगी."

झारखंड सरकार की कोशिश राँची एयरपोर्ट पर इन सभी यात्रियों की स्क्रीनिंग कर उन्हें विशेष बसों से उनके गृह जिलों के लिए रवाना किया गया. एयरपोर्ट पर इनके लिए पानी और स्नैक्स का भी इंतज़ाम किया गया था. बसें सैनिटाइज कर तैयार रखी गई थीं. इससे पहले झारखंड सरकार ने भी गृह मंत्रालय को पत्र भेजकर मजदूरों के लिए कुछ चार्टर्ड फ्लाइट्स चलाने की अनुमति मांगी थी. सरकार अंडमान, लद्दाख और कुछ उन जगहों से मजदूरों को विशेष विमान से झारखंड वापस लाना चाहती है, जिन्हें ट्रेन या बसों से लाना संभव नहीं है.

पहली ट्रेन भी झारखंड आई थी मई दिवस के मौके पर तेलंगाना के लिंगमपल्ली रेलवे स्टेशन से झारखंड के हटिया तक आने वाली विशेष ट्रेन भी देश की पहली वैसी ट्रेन थी, जिसका लॉकडाउन के दौरान परिचालन हुआ. उस ट्रेन के परिचालन के बाद रेलवे ने बैठक कर श्रमिक स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला किया था. उस विशेष ट्रेन से करीब 1200 मजदूर झारखंड वापस लौटे थे. इसको लेकर काफ़ी सियासत भी हुई थी. संभव है कि यह इत्तिफ़ाक़ हो. फिर भी यह सच याद रखा जाएगा कि मजदूरों की पहली ट्रेन और पहली फ़्लाइट दोनों झारखंड के लिए चलीं.