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कोरोना लॉकडाउन: प्रवासी मज़दूरों के लिए क्या कर रही हैं राज्य सरकारें? मध्य प्रदेश में अब भी पैदल पहुंच रहे मज़दूर प्रदेश के मुख्यमंत्री, म.प्र. शासन, सांसद,विधायक एवं जिला प्रशासन मुकदर्शक बनकर बैठे हैं ओड़िसा में फंसे मजदुरों को दुसरे प्रदेश में मरने के लिये छोड़ दिया है - दिनेश साहू प्रवक्ता मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी
May 12, 2020 • Mr. Dinesh Sahu • सम्पादकीय

मध्य प्रदेश में अब भी पैदल पहुंच रहे मज़दूर प्रदेश के मुख्यमंत्री, म.प्र. शासन, सांसद,विधायक एवं जिला प्रशासन मुकदर्शक बनकर बैठे हैं मजदुरों को दुसरे प्रदेश में मरने के लिये छोड़ दिया है

मध्य प्रदेश में कोरोना संकट की वजह से हुए लॉकडाउन के बाद मध्यप्रदेश के मज़दूर अपने राज्य का रुख कर रहे हैं. सरकार के दावे के मुताबिक़ अब तक 2.15 लाख प्रदेश में सरकारी मदद से वापस आ चुके हैं वही हज़ारों की तादाद में मजदूर पैदल ही प्रदेश लौट रहे हैं. आने वाले मज़दूर अपने शोषण और परेशानी की दर्दनाक कहानी बयां कर रहे हैं. लगभग 40 दिन से भी ज्यादा फंसे रहे इन मज़दूरों के पास न तो अब काम है और न ही पैसे. जो थोड़े पैसे इन्होंने कमाए थे वो लगभग खत्म हो चुके हैं. प्रदेश में पहुंचते ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इनका स्वागत करने और खान पान की व्यवस्था करने के आदेश ज़िला कलेक्टरों को दिए हैं. लेकिन हक़ीक़त में स्थिति कुछ और है. ज़्यादातर मज़दूरों की मदद के लिए स्थानीय लोग और संस्था ही नज़र आ रहे हैं. रमेश शंकर पैदल ही नासिक से अपनी मंज़िल के लिए अपने दोस्तों के साथ चले हैं. रमेश ने बताया कि किराए के लिए न तो पैसे हैं न ही कोई दूसरा साधन मिल रहा है इसलिए पैदल ही जा रहे हैं. भोपाल में स्थानीय संस्थाएं इन्हें खाना और पानी मुहैया करा रही हैं. इसके साथ ही कोशिश की जा रही है कि इन्हें आगे पैदल न जाना पड़े और कुछ साधन उपलब्ध करा दिया जाएं. वही शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि कहीं भी किसी भी मज़दूर को प्रदेश की सीमा के अंदर पैदल न चलने दिया जाए लेकिन अभी तक ऐसा नहीं हो पाया है. कोरोना संक्रमण को लेकर किए गए लॉकडाउन की वजह से देश के विभिन्न राज्यों में फंसे हुए प्रवासियों को घर वापस लाने की मुहिम चल रही है. इस क्रम में हज़ारों की संख्या में प्रवासी मज़दूरों का भी अपने अपने राज्यों में वापस लौटना जारी है. दूसरे राज्यों में फंसे इन मज़दूरों को विशेष ट्रेनों और बसों से लाया जा रहा है. हालांकि हज़ारों की तादाद में पहुंच रहे मज़दूरों को लेकर राज्य की चिंताएं अब बढ़ने लगी हैं क्योंकि क्वारंटीन की समायवधि ख़त्म होते ही राज्य सरकारों को इनके लिए रोज़गार की वैकल्पिक व्यवस्था करनी होगी. वैसे उत्तर प्रदेश जैसे कुछ राज्यों ने स्थानीय स्तर पर ऐसी ही कुछ वैकल्पिक व्यवस्था करने की योजना बनाई है. चलिए देखते हैं कि उत्तर प्रदेश समेत बिहार, झारखंड और मध्य प्रदेश में पहुंच रहे इन प्रवासी मज़दूरों की तादाद कितनी और स्थिति कैसी है और साथ ही यह भी कि राज्य सरकारें इनके भविष्य को लेकर क्या किसी योजना पर काम कर रही हैं. आखिर क्या है राज्य सरकार की तैयारी?