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लद्दाख में सड़क निर्माण के लिए नहीं जा पाएंगे झारखंड के मज़दूर
June 17, 2020 • Mr. Dinesh Sahu • देश / विदेश

फैसला भारत-चीन की सरहद पर जारी ताज़ा तनाव के मद्देनज़र लिया गया है.

लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) की परियोजनाओं 'हिमांक' और 'विजयक' के लिए झारखंड के मज़दूरों को ले जाने वाली ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं. यह फैसला भारत-चीन की सरहद पर जारी ताज़ा तनाव के मद्देनज़र लिया गया है. गलवान घाटी में सोमवार की रात दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद बीआरओ ने रेलवे से इन ट्रेनों को फ़िलहाल रद्द करने का आग्रह किया था. ये ट्रेनें दुमका से रवाना की जानी थीं. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इसकी पुष्टि की है.

"मुख्यमंत्री जी ने कहा है कि स्थिति सामान्य होते ही इन्हें भेजे जाने का इंतज़ाम कराया जाएगा.

 

तब तक उन्हें हम स्थानीय स्तर पर रोज़गार परियोजनाओं से जोड़ने की कोशिश करेंगे. इसके लिए विभिन्न विभागों को निर्देश दिए जा रहे हैं." . भारत-चीन तनावः सीमा पर 20 भारतीय सैनिकों की मौत, क्या बोला चीन? - भारत-चीन सीमा विवाद: 45 साल बाद ये नौबत क्यों आई? पांच ट्रेनें कैंसिल इस बीच दुमका से 16, 20, 24, 28 जून और 4 जुलाई को जाने वाली श्रमिक स्पेशल ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं. बीआरओ के ब्रिगेडियर नितिन कुमार शर्मा ने पूर्व रेलवे के अधिकारियों को मेल कर इसका अनुरोध किया था. मंगलवार की शाम सात बजे ऐसी ही एक ट्रेन (नंबर-00355) दुमका से चंडीगढ़ के लिए खुलने वाली थी. बीआरओ के मेल के बाद उसे कैंसिल कर दिया गया. इसके साथ ही चार और ट्रेनें कैंसिल कर दी गई. दुमका की उपायुक्त (डीसी) राजेश्वरी बी ने मीडिया को यह जानकारी दी.

सैकड़ों मज़दूर घर लौटे इधर, ट्रेन रद्द होने की पूर्व सूचना नहीं मिलने के कारण संताल परगना प्रमंडल के विभिन्न जिलों के सैकड़ों मज़दूर मंगलवार की दोपहर तक दुमका पहुंच गए थे. ट्रेन स्थगित होने के बाद वे मायूस दिखे. गोड्डा जिले से आए श्रवण मंडल, रवींद्र मंडल, सुधीर मंडल, अजीत मंडल, गौतम दास इन मज़दूरों में शामिल थे. इनका मानना है कि जब बीआरओ ही लद्दाख ले जा रहा था, तो डरने की ज़रूरत नहीं थी. श्रवण मंडल ने बीबीसी से कहा, "हमारा श्रमिक काई बन गया था. अफ़सर लोग बोले कि ट्रेन में कोई पैसा नहीं लगेगा. खाने का भी इंतज़ाम है. इसलिए हमलो ग लद्दाख जाने के लिए आ गए, क्योंकि वहां अच्छी कमाई होती, तो दो पैसा घर पर भेजते. यहां तो कोई काम ही नहीं मिल रहा है. अब फिर से बेरोज़गार रहना होगा. अब हमें घर जाने के लिए कहा गया है. इसका दुख है." ये भी पढ़ें:भारत-चीन सीमा पर हिंसक झड़प में मारे गए जवानों की सूची

क्या डर नहीं लगता? गौतम दास का नाम भी इस ट्रेन के यात्रियों की सूची में शामिल था. वे अब लद्दाख नहीं जा पाएंगे. लद्दाख जाने पर इर के सवाल पर उन्होंने बीबीसी से कहा, "क्या डर लगेगा सर. हमलोग सुने हैं कि कुछ टेंशन हुआ है बॉर्डर पर. लेकिन, हमलोग मज़दूर आदमी हैं. जहां पैसा मिलेगा, काम करेंगे. अभी घर से फ़ोन आया कि अच्छा हुआ कि ट्रेन कैंसिल हो गई. वहां जाने में रिस्क था. घरवाले चाहते हैं कि हम वहां नहीं जाएं लेकिन ट्रेन खुलती तो हम चले गए होते. बताइए कि हम भूख देखें कि जान." ये भी पढ़ें: भारत-चीन सीमा पर झड़प में बिहार के 5 जवानों की हुई है मौत बीआरओ और झारखंड सरकार के बीच हुए क़रार के बाद झारखंड के 1630 मज़दूरों को लेकर बीआरओ की एक स्पेशल ट्रेन 13 को दुमका से उधमपुर गई थी. वहां से इन मज़दूरों को लद्दाख ले जाकर पहले 15 दिनों के लिए क्वारंटीन करना था. इसके बाद उन्हें चीन की सीमा पर बन रही सड़कों के निर्माण कार्य में लगाया जाता. इससे पहले ही सरहद पर तनाव हो गया. बीआरओ और झारखंड सरकार के बीच हुए क़रार के बाद झारखंड के 1630 मज़दूरों को लेकर बीआरओ की एक स्पेशल ट्रेन 13 जून को दुमका से उधमपुर गई थी. वहां से इन मज़दूरों को लद्दाख ले जाकर पहले 15 दिनों के लिए क्वारंटीन करना था. इसके बाद उन्हें चीन की सीमा पर बन रही सड़कों के निर्माण कार्य में लगाया जाता. इससे पहले ही सरहद पर तनाव हो गया. उस ट्रेन को हरी झंडी दिखाने के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन दुमका गए थे. तब कहा गया था कि बीआरओ यहां के क़रीब 12,000 मज़दूरों के लिए आधा दर्जन ट्रेनें चलवाएगा. इसका शिड्यूल भी तय कर दिया गया था. अब ये सभी ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं.