ALL देश / विदेश सम्पादकीय लेख /आलेख अध्यात्म मध्यप्रदेश राजधानी - भोपाल खेल / विज्ञानं एवं टेक्नोलॉजी मनोरंजन / व्यापार रोजगार के पल शाषकीया विज्ञापन रोजगार के पल क्लासिफाइड विज्ञापन
पोहरी : यहां पूर्व और वर्तमान कांग्रेसियों के बीच है रोचक मुकाबला
September 29, 2020 • Mr. Dinesh Sahu • मध्यप्रदेश

पोहरी की फिजा इस चुनाव में काफी बदली-बदली सी दिख है। - अरुण पटेल

पोहरी विधानसभा क्षेत्र में बड़ा ही दिलचस्प और कांटेदार चुनावी मुकाबला होने जा रहा है जहां पर चुनावी राजनीति के अनुभवी खिलाड़ी हरिवल्लभ शुक्ला कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में और कांग्रेस के पूर्व विधायक सुरेश धाकड़ जो कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ भाजपा में चले गए हैं, अब भाजपा उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में होंगे। वहीं बसपा ने एक बार फिर 2018 के चुनाव के अपने उम्मीदवार कैलाश कुशवाह पर दांव लगाया है। शुक्ला पूर्व में कांग्रेस विधायक रह चुके हैं तथा उन्हें कई चुनाव लड़ने का अनुभव है इसलिए इस उपचुनाव में उनकी एक साथ 2018 के चुनाव के विजेता धाकड़ और उसी चुनाव के पराजित उम्मीदवार कुशवाह से भिड़त होगी। क्षेत्र में चुनावी मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है और देखने वाली बात यही होगी कि बसपा उम्मीदवार कुशवाह स्वयं विधानसभा पहुंचेंगे या धाकड़ और शुक्ला में से किसे पहुंचाने में मददगार साबित होंगे। शुक्ला विधायक के रुप में विधानसभा में काफी मुखर रहे हैं और पुराने चुनावी योद्धा हैंपुराने दांव पेच से वह चुनावी राजनीति में उनकी तुलना में नए नवेले उम्मीदवारों को चित कर पाते हैं या इनमें से कोई नया दांव लगा कर उन्हें चित कर देता है, यही इस चुनावी लड़ाई में दिलचस्पी का विषय रहेगा।

फिलहाल पोहरी की फिजा इस चुनाव में काफी बदली-बदली सी दिख है। दलबदल के पहले और बाद में सुरेश धाकड़ की भूमिका से क्षेत्र के लोग खुश नहीं थे। दलबदल के कारण उनकी लोकप्रियता का ग्राफ और नीचे आ गया। दलबदल के बाद उन्हें सिंधिया के कारण शिवराज सिंह चौहान मंत्रिमंडल में जगह मिल गई तो धाकड़ समर्थक अब उनकी जीत को लेकर कुछ अधिक आशान्वित नजर आ रहे हैं। यदि धाकड़ को दलबदल के कारण कुर्सी मिली, तो साथ में स्वाभाविक विरोधी भी मिल गए। जहां तक बूथ प्रबंधन का सवाल है भाजपा उम्मीदवार को इसकी कोई चिंता नहीं होती क्योंकि उसके पीछे मजबूत संगठन पूरी ताकत से खड़ा रहता है, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार को सारी जमावट खुद करना पड़ती है। पोहरी में ब्राह्मण और धाकड़ मतदाता बड़ी संख्या में है इसलिए शुक्ला व धाकड़ में दिलचस्प चुनावी मुकाबला होने की संभावना है। सिंधिया के भाजपा में आने से पहले तक इस क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर के अलावा शिवराज की निजी दिलचस्पी रही है क्योंकि यहां पर उनके नाते रिश्तेदार भी हैं।भाजपा के पूर्व विधायक प्रहलाद भारती शिवराज के करीबी हैं तथा यह क्षेत्र तोमर के पुराने लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र ग्वालियर के अंतर्गत आता है। धाकड़ के कारण अब सिंधिया की दिलचस्पी भी काफी बढ़ गई है क्योंकि धाकड़ ने उनके साथ ही कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आने का फैसला किया था

पोहरी के पिछले 5 चुनाव का रिकॉर्ड देखा जाए तो वहां पर तीन चुनावों में भाजपा और एक- एक चुनाव में समानता दल तथा कांग्रेस ने जीत दर्ज की है। 1998 में भाजपा के नरेंद्र बिरथरे ने कांग्रेस की बैजंती वर्मा को 1042 मतों के अंतर से पराजित मानता किया थाबिरथरे को 25433 तथा कांग्रेस की बैजंती वर्मा को 24391 मत मिले थे। 2003 के विधानसभा चुनाव में समानता दल के हरिवल्लभ शुक्ला ने कांग्रेसी वैजयंती वर्मा को 6040 मतों से पराजित कर दिया। इस चुनाव में शुक्ला को 29401 तथा कांग्रेस की वैजयंती वर्मा को 23361 मत मिले और भाजपा दूसरे पायदान पर भी नहीं आ पाई। 2008 में भाजपा के पहलाद भारती ने बसपा उम्मीदवार के रूप में हरि वल्लभ शुक्ला को 19390 मतों से पटखनी दी और कांग्रेस यहां तीसरे नंबर पर खिसक गई। भारती को 45209 और शुक्ला को 25819 मत मिले। 2013 में भाजपा के भारती ने कांग्रेस उम्मीदवार के रूप में शुक्ला को 3625 मतों के अंतर से पराजित किया। 2018 के चुनाव में कांग्रेस के सुरेश धाकड़ ने बसपा के कैलाश कुशवाहा को 7918 मतों से पराजित किया भाजपा तीसरे नंबर पर पहुंच गई। चुनाव में हारने के बाद कैलाश कुशवाह को बसपा ने फिर से एक मौका और दिया है ताकि वह पिछली हार का बदला ले सकें। अब यह तो नतीजों से ही पता चलेगा कि कुशवाह बसपा की उम्मीदों पर खरे उतरते हैं या फिर धाकड़ और शुक्ला में से किसी एक को जिताने का कारण बन कर रह जाते हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष कमलनाथ का पक्का भरोसा उन चेहरों पर रहता है जो कि सर्वे की कोख से निकलते हैं और हरिवल्लभ शुक्ला की लॉटरी भी खुलने का एक कारण यह भी हो सकता है। कमलनाथ ने 1980 में छिंदवाड़ा से अपनी संसदीय राजनीति की धमाकेदार शुरुआत की थी और 80 के दशक में शुक्ला भी कांग्रेस के विधायक हुआ करते थे। शुक्ला कोई ना कोई करिश्मा चुनाव में कर दिखाएंगे इसी उम्मीद पर कमलनाथ ने उनके नाम पर मोहर लगाई है अब यह तो मतगणना से ही पता चलेगा कि शुक्ला उनकी उम्मीदों पर कितने खरे उतरते हैं। तण