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सरकार की फिर खुली कलई, अतिथि विद्वानों के मामले में भी सदन में सच आया सामने
September 29, 2020 • Mr. Dinesh Sahu • राजधानी - भोपाल

कमलनाथ सरकार में जीतू पटवारी ने सृजित किये थे अतिथि विद्वानों के 950 पद अतिथि विद्वानों को नियमित करने की माँग पर क्यों झल्ला रहे है मंत्री मोहन यादव : भूपेन्द्र गुप्ता

भोपाल,

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग के उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा है प्रदेश में अलोकतांत्रिक तरीके से पीछे के रास्ते से सत्ता में आई भाजपा की शिव-ज्योति पैसेन्जर सरकार की कलई एक बार फिर खुल गई है। अतिथि विद्वानों को नियमित किए जाने के मामले में प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने एक लिखित उत्तर में यह माना है कि तत्कालीन कमलनाथ सरकार अतिथि विद्वानों को नियमित करने जा रही थी। प्रदेश के किसानों की कर्जमाफी और अतिथि विद्वानों के नियमितिकरण को लेकर भाजपा नेताओं और सरकार द्वारा फैलाए जा रहे भ्रम को उन्ही के द्वारा विधानसभा के पटल पर यह स्वीकार करना पड़ रहा है कि कमलनाथ सरकार किसान कर्जमाफी के साथ ही अतिथि विद्वानों को नियमित करने भी जा रही थी। लेकिन माफिया के सहयोग से सरकार गिरा दी गई। भूपेन्द्र गुप्ता ने बताया कि विधानसभा में पूर्व मंत्री जीतू पटवारी द्वारा किए गए एक सवाल के जवाब में उत्तर देते हुए शिवराज सरकार ने यह माना है कि पूर्व उच्च शिक्षा मंत्री मंत्री जीतू पटवारी ने अतिथि विद्वानों को नियमित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी थी। जिसको लेकर उन्होंने एक नोटशीट पर अतिथि विद्वानों के नियमितिकरण के लिए कैबिनेट में प्रस्ताव दिया था। जिस पर जल्द ही फैसला होने वाला था। लेकिन उससे पहले ही साजिश के तहत माफिया और गद्दारों के गठजोड़ ने अलोकतांत्रिक तरीके से कमलनाथ सरकार गिरा दी यह किसी से छुपा नहीं है 

वहीं अपने नियमितिकरण की माँग को लेकर जब अतिथि विद्वान उच्च शिक्षा मंत्री के पास अपनी गुहार लेकर जाते है तो वह झल्ला कर आत्महत्या कर लेने के ताने देते रहे है। मुश्किलों से जीवन यापन करने वाले अतिथि विद्वानों की व्यथा सुनने की बजाय उच्च शिक्षा मंत्री अपना आपा खो कर एक आम आदमी की तरह व्यवहार कर रहे है जबकि वह एक संवैधानिक पद पर बैठे ऐसे विभाग के मंत्री है जिसके कर्मचारी अपनी नियमितिकरण की माँग करते हुए उनसे निवेदन कर रहे है। उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव का यह वक्तव्य कि क्या वह आत्महत्या कर ले यह संवैधानिक पद पर बैठे एक जन प्रतिनिधि को शोभा नहीं देता। जबकि महिला अतिथि विद्वानों को उनके सहायक अपमानित कर रहे है यह भी घोर निंदा का विषय है। आप किसी के घावों पर मरहम नहीं लगा सकते तो उस पर नमक मिर्ची तो मत लगाओ। कांग्रेस कमेटी के मीडिया उपाध्यक्ष भूपेन्द्र गुप्ता ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कमलनाथ सरकार से भय था कि पिछले 15 सालों के भाजपा शासन काल में किए गए भ्रष्ट्राचार, घोटालों का पर्दा धीरे-धीरे उठ रहा था। वही ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कमलनाथ सरकार पर और दबाव नहीं बना पा रहे थे

ज्योतिरादित्य सिंधिया को इसी का डर था कि कही पार्टी में रहते हुए उनके ही काले कारनामों को सरकार उजागर न कर दे। जिसके चलते शिवराज सिंह चौहान और ज्योतिरादित्य सिधिया ने साजिशन एक जन लोकप्रिय सरकार को जो कमलनाथ जी के नेतृत्व में चल रही थी इसे किसान कर्जमाफी और अतिथि विद्वानों के नियमितिकरण का झूठा मुद्दा बनाकर गिरा दिया। भूपेन्द्र गुप्ता ने बताया कि कांग्रेस की कमलनाथ सरकार के उच्च शिक्षा मंत्री जीतू पटवारी ने अतिथि विद्वानों को नियमित करने के लिए नए पद सृजित किए थे। जो अतिथि विद्वान फॉल इन ऑउट हुए थे उनके लिए यह पद सृजित किए गए थे और 950 पदों पर तत्काल चॉइस फिलिंग करवाकर उनको आवंटन पत्र जारी करने के निर्देश दे दिए थे। 9 मार्च 2020 को यह प्रक्रिया पूरी हो मित्र गई थी। जबकि कमलनाथ सरकार ने अतिथि विद्वानों के लिए 450 अतिरिक्त पद स्वीकृत किए थे। लेकिन अलोकतांत्रिक तरीके से सत्ता में आई भाजपा की शिवराज सरकार अतिथि विद्वानों को नियमितिकरण करने की वजाय उनके घावों पर नमक छिड़कने का काम कर रही है