ALL देश / विदेश सम्पादकीय लेख /आलेख अध्यात्म मध्यप्रदेश राजधानी - भोपाल खेल / विज्ञानं एवं टेक्नोलॉजी मनोरंजन / व्यापार रोजगार के पल शाषकीया विज्ञापन रोजगार के पल क्लासिफाइड विज्ञापन
तृष्णा* - कामिनी परिहार
May 24, 2020 • Mr. Dinesh Sahu • सम्पादकीय

*तृष्णा* *=======* *एक व्यापारी था, वह ट्रक में चावल के बोरे लिए जा रहा था। एक बोरा खिसक कर गिर गया। कुछ चीटियां आयीं 10-20 दाने ले गयीं, कुछ चूहे आये 100-50 ग्राम खाये और चले गये, कुछ पक्षी आये थोड़ा खाकर उड़ गये, कुछ गायें आयीं 2-3 किलो खाकर चली गयीं, एक मनुष्य आया और वह पूरा बोरा ही उठा ले गया।* *अन्य प्राणी पेट के लिए जीते हैं, लेकिन मनुष्य तृष्णा में जीता है। इसीलिए इसके पास सब कुछ होते हुए भी यह सर्वाधिक दुखी है।* *आवश्यकता के बाद इच्छा को रोकें, अन्यथा यह अनियंत्रित बढ़ती ही जायेगी, और दुख का कारण बनेगी।✍🏻* *चौराहे पर खड़ी जिंदगी* *नजरें दौड़ाती हैं..*_ 👀 *काश कोई बोर्ड दिख जाए* *जिस पर लिखा हो...*_ ✍🏻 *"सुकून..* *0. कि.मी."*